Wednesday, July 15, 2015

नए अवतार में धरम लाल कौशिक

!! छत्तीसगढ़ : भाजपा !!

सरकार के चिकने-चुपड़े पैरोकार भले ही इसका खंडन करें, मगर धीरे-धीरे ही सही, धरम लाल कौशिक ने प्रदेश भाजपा में अपनी जड़ें इस कदर जमा ली हैं कि पार्टी उन्हें वैकल्पिक चेहरे के तौर पर देख रही है। लाल बत्ती बांटने में श्री कौशिक ने अपने पॉवर का पूरा सदुपयोग किया और चार समर्थकों को सूची में एडजस्ट करा दिया। हालांकि सांसद रमेश बैस, सरोज पाण्डे, रामविचार नेताम, केदार कश्यप और बृजमोहन अग्रवाल जैसे वरिष्ठ विश्वसनीय चेहरों को पछाडऩा कौशिक के लिए बड़ी चुनौती होगी जो तीव्र और लपलपाती इच्छा के साथ मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए बैठे हैं।
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प्रदेश भाजपा की राजनीति दिन-प्रतिदिन करवटें बदल रही है। अंदरखाने से निकलकर आई ताजा खबर यह है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री धरम लाल कौशिक, संगठन और सरकार के बीच एक नई ताकत बनकर उभरे हैं। इसके संकेत ताजा मंत्रिमण्डल विस्तार से मिले हैं। सूत्रों के मुताबिक श्री कौशिक की सलाह पर मुख्यमंत्री ने चार चेहरों को लालबत्ती से नवाजा है। इनमें से दो चेहरे ऐसे हैं जिन्हें मुख्यमंत्री ना तो मंत्री बनाने के इच्छुक थे और ना ही कोई निगम-मण्डल पकड़ाना चाहते थे लेकिन ऐनवक्त पर कौशिक के प्रभावी हस्तक्षेप ने इन नेताओं का बेड़ापार करवा ही दिया। बाकी दो को भी प्रदेश भाजपा के मुखिया का आर्शीवाद मिला है।

सबसे ज्यादा पेंच विधायक युद्धवीर सिंह जूदेव को लेकर था। जशपुर जिला में जूदेव परिवार का खासा दबदबा और समर्थन है। स्व. दिलीप सिंह जूदेव ने जनता का जो विश्वास हासिल किया था, उसी का प्रतिफल है कि आज युद्धवीर दूसरी बार विधायक बने हैं। बतौर संसदीय सचिव उनका कार्यकाल सराहनीय रहा था। इस बार जूदेव मंत्री बनना चाहते थे लेकिन मुख्यमंत्री की नापसंदगी के चलते उनका सपना अधूरा ही रह गया मगर  कौशिक की कृपा के बाद वे आबकारी निगम के चेयरमैन तक पहुँच ही गए। दरअसल छोटे जूदेव के कार्यकलापों को लेकर सरकार, संघ और संगठन का एक धड़ा हमेशा चिंतित रहता आया है। कई नेताओं ने इसकी शिकायत ना सिर्फ मुख्यमंत्री से की बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी संदेश भेजा जा चुका है कि जूदेव को लाल बत्ती देना खतरे से खाली नहीं।

सब तरफ से निराशा हाथ लगने के बाद अंतत: छोटे जूदेव ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक का दामन थामा जिसके बाद कौशिक ने संगठन महामंत्री राम प्रताप सिंह को मनाया और दोनों ने मिलकर मुख्यमंत्री से युद्धवीर को निगम-मण्डल में एडजस्ट करने की सिफारिश कर दी। मुख्यमंत्री सचिवालय के मुताबिक मंत्री ना बनने से गुस्साये युद्धवीर के समर्थकों ने जशपुर बंद रखते हुए डॉ. रमनसिंह का पुतला फूँका था जिससे पार्टी और संगठन के बड़े नेताओं के कान खड़े हो गए थे मगर जैसा कि भाजपा अनुशासन के मामले में बेहद सख्त मानी जाती है सो युद्धवीर को कड़ा संदेश भिजवा दिया गया। इसके बाद छोटे जूदेव कई दिनों तक डैमेज कंट्रोल में लगे रहे।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का आर्शीवाद पाने वालों में एक नाम भूपेन्द्र सवन्नी का है। भाजपा के महामंत्री रह चुके सवन्नी, कौशिक के दाएं हाथ माने जाते हैं। दूसरा वे जिस सिख समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, वह भाजपा का तगड़ा वोटबैंक भी है। सवन्नी एक तरफ कौशिक के सिपहसालार बने रहे तो दूसरी ओर बतौर महामंत्री, संगठनमंत्री रामप्रताप सिंह का विश्वास भी हासिल करते रहे। दोनों की नजदीकी का ही सिला रहा कि उन्हें हाऊसिंग बोर्ड जैसे कमाऊ विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष कृष्णा रॉय भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक का आर्शीवाद लेने में सफल रहे। इसके पीछे पूर्व में पर्यटन मण्डल और फिर हस्तशिल्प बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर श्री रॉय का पिछला कार्यकाल बेदाग रहा था जिसके चलते उन्होंने मुख्यमंत्री का आर्शीवाद हासिल किया मगर श्री कौशिक ने इस बार रॉय का नाम खुद होकर आगे बढ़ाया नतीजन श्री राय, खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड का पद हासिल करने में सफल रहे।

पहले विधायक और फिर राजधानी का महापौर बनते-बनते रह गए पार्टी के युवा नेता संजय श्रीवास्तव की सिफारिश भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने ही की। दरअसल युवा मोर्चा का अध्यक्ष रहते हुए श्रीवास्तव ने श्री कौशिक की मदद संगठन को तराशने में की थी। बतौर सभापति उनका कार्यकाल भी बेदाग और परिणामदायी रहा था। दूसरी ओर जातीय समीकरण के हिसाब से वे फिट बैठ रहे थे। पहले विधायक, फिर महापौर की टिकट से वंचित रहने वाले संजय श्रीवास्तव को निगम-मण्डल सौंपने का मन खुद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बना लिया था लेकिन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री कौशिक ने भी उन्हें गहरा समर्थन दे दिया। संभवत: इन्हीं समीकरणों के चलते श्रीवास्तव को रायपुर विकास प्राधिकरण जैसे विभाग की जिम्मेदारी मिली है।

तो साफ है कि श्री कौशिक अपनी आवश्यकता सिद्ध करते जा रहे हैं। इस पूरी कहानी का लब्बोलुआब यही है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक, संगठन और सरकार में एक ऐसे शिखर पुरूष के तौर पर उभरे हैं जो उदार आईने में फिट हैं तथा पार्टी के लिए विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं। थोड़ा साफ करेंं तो उनके समर्थक उनमें मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी नजर पाते हैं। हालांकि अपनी अदाभरी शालीन चुप्पी के साथ कौशिक इसे महज मीडिया का आंकलन करार देते हैं लेकिन सच यह है कि भविष्य में यदि मुख्यमंत्री पद के विकल्पों की तलाश पार्टी करती है तो जातीय समीकरण के हिसाब से कौशिक इस पर फिट बैठते हैं। हालांकि उनके समक्ष रमेश बैस, सरोज पाण्डे, नंद कुमार साय, रामविचार नेताम और केदार कश्यप जैसे वरिष्ठ विश्वसनीय चेहरे को पछाडऩा बड़ी चुनौती होगी जो तीव्र और लपलपाती इच्छा के साथ मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए बैठे हैं।

अनिल द्विवेदी
लेखक राजनीतिक समीक्षक हैं

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